कहते हैं, हर प्रेम कहानी की कोई शुरुआत होती है,
हमारी कहानी शायद तुम्हारे पहले मुस्कुराने से शुरू हुई थी।
तुम बहुत छोटी थीं,
और पापा को तब कहाँ पता था,
कि उनकी पूरी दुनिया तुम्हारी एक मुस्कान में बसने वाली थी।
फिर पेप्पा पिग की कहानियाँ आईं,
पावरपफ गर्ल्स का ज़माना आया,
बार्बी का घर सजाया,
और पापा की गोद ने तुम्हें अपना सबसे प्यारा ठिकाना बनाया।
नन्हे-नन्हे कदमों से स्केटिंग की शुरुआत हुई,
फिर साइकिल ने अपनी रफ़्तार पकड़ी,
पानी में तैरते-तैरते तुमने जाना,
कि हर नई ऊँचाई तुम्हारी अपनी है।
सोफ़े से चढ़ने वाली छोटी-सी आरना,
आज दीवारों पर चढ़ने का हुनर रखती है,
कल तक जिसे पापा हाथ पकड़कर चलाते थे,
आज वही पापा को अपनी दुनिया की नई राहें दिखाती है।
कुछ बातें हैं हमारी, जो सिर्फ हम दोनों समझते हैं,
कुछ हँसी, कुछ इशारे, कुछ राज़, जो मम्मी से छुपते हैं।
कभी रूठना, कभी लड़ना, फिर ऐसे ही मान जाना,
तुम्हारी चुप्पी पढ़ लेना, बिना तुम्हारे कुछ कहे समझ जाना।
तुम हर दिन बड़ी हो रही हो,
अपनी एक नई दुनिया सजा रही हो,
हर नए कदम, हर नई उड़ान से,
पापा का दिल और गर्व से भर रही हो।
तुम उड़ो अपनी ऊँची उड़ान,
छू लो अपना हर आसमान,
जहाँ भी जाओ, जैसे भी जियो,
खुशियों से भरता रहे तुम्हारा हर जहान।
और जब कभी पीछे मुड़कर देखोगी,
तो ये छोटी-छोटी यादें मुस्कुराएँगी,
पेप्पा पिग से लेकर साइकिल तक,
स्केटिंग से लेकर तैराकी तक,
हमारी हर कहानी फिर से सुनाएँगी।
क्योंकि ये सफ़र सिर्फ बड़ा होने का नहीं,
हर दिन कुछ नया पाने का है,
तुम्हारे चमकते हर कल में,
पापा के आज का प्यार छुपा है।
तुम चलती रहो, बढ़ती रहो,
हर दिन और निखरती रहो,
और हमारी इस छोटी-सी दुनिया में,
हँसी यूँ ही बिखेरती रहो।
आरना और पापा की ये कहानी,
न कोई शुरुआत, न कोई रवानी—
बस हर दिन एक नया पल,
और हर पल में हमारी अपनी निशानी।
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